सतनामी समाज में मुख्यरूप से प्रचलित उपनाम /कुलनाम

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सतनाम धर्म की पहचान :

संत शिरोमणी गुरू बाबा घासीदास जी ने सतनाम धर्म की सात पहचान बताये है व सात पहिचान का पालन करनें वाला सतनामी है।
1.गुरू – सतनामधर्म के अनुसार भारत सहित पूरे विश्व में सतनामी समाज गुरूप्रधान समाज है। गुरू समाज के मार्गदर्शक, आदेशक, निर्देशक, नियंत्रक व संचालक है। समाज में गुरू का स्थान सर्वोच्च व पुज्यनीय है। समाज में किसी भी प्रकार के नियम/निर्णय हेतु गुरू का मत अंतिम व सर्वमान्यहोता है।
2. जैतखाम – पवित्र जैतखाम/विजयखाम/ गुरू बाबा घासीदास जी का अलिखित संविधान है, जैतखाम प्रकृति के हवा जल, अग्नि, पृथवी व आकाश पंचतत्व का बोध कराता है। जैतखाम सतनामधर्म के अनुयायी सतनामी समाज का पहचान है जैतखाम जो इक्कीस हाथ लंबाई जिस पर तीन हूक व पाॅच हाथ डण्डा में सफेद कपड़े का झण्डा (पालो) प्रतिवर्श में पर्व पर चढ़ाया जाता है। जैतखाम गुरू की आज्ञा व समाजिक प्रस्ताव कर समाज के चैक /चैराहा या गुरूद्वारा परिसर में गड़ाया जाता है। पवित्र जैतखाम समता,स्वतंत्रता,बंधुता,न्याय व जैतखाम में लगे तीन गुजर प्रेम,दया करूणा तथा पाॅच हाथ का डण्डा पंचशील,पचंतत्व,पाच नाम एवं सफेद झण्डा शान्ति का प्रतिक है। जैतखाम में पालो चढ़ावा प्रतिवर्ष 18 दिसम्बर गुरू पर्व को गुरूवंषज व गुरू के प्रतिनिधि राजमंहत,दीवान,भण्डारी या सामाजिक कार्यकर्ता के द्वारा चढ़ाया जाता है।
3. गुरूगद्धी- सतपुरष अर्थात सतनामपिता उस परमपिता का नाम है,जिसके द्वारा इस संसार की रचना हुई है। सत्य ही सतपुरष है,सतपुरष ही सत्य है। सतनामधर्म के अनुयायी उसी सतपुरष/गुरू के लिए आसन गद्वी लगाया जाता है । आसन गद्वी पुजा एक पाटे की पिढ़ली पर सफेद वस्त्र बिछाकर श्वेत जनेऊ, कण्ठीमाला रखकर सुपारी, नारीयल, लौग, लायची व बंगला के पान भेट किया जाता है। आसन के निचे खड़ाऊ रखकर प्रतिवर्ष में पर्व पर आसन गद्वी लगाया/पलटा जाता है।
4. जनेऊ – सतनामधर्म में जनेऊ सतनामी समाज के पुरूषो को सतनाम पुजा/कथा/यज्ञ के उपरांत सतनामसुत्र जनेऊ सात गांठ व नौ ताग का बाये कंधे से दाई ओर गुरू घासीदास की जाप करके साहेब गुरू सतनाम पाच गुरू के पाँच नाम से धारण करना चाहिए। जनेऊ धारण विवेक, धैर्य व व्रतबंधन का प्रतिक है।
5. कण्ठीमाला – गुरूगद्वीनसीन जगतगुरू जी के द्वारा समाजजनो को समाजिक पदो के कर्तव्य निर्वाहन व गुरूदीक्शा के समय कंठीमाला गुरू घासीदास की जाप करके साहेब गुरू सतनाम पाच गुरू के पाँच नाम से पहिनातें है। कण्ठी सत्य की भक्ति की प्रतिक है।
6.तिलक – सतनामधर्म के अनुयायी सतपुरष,गुरू बाबाघासीदास व पवित्र जैतखाम की आरती मंगल कर सभी प्रकार के सामाजिक धार्मिक कार्यो में महिला व पुरूष सफेद चंदन की तिलक अपने मस्तक में साहेब गुरू सतनाम पाच गुरू के पाँच नाम से लगाते है। तिलक सतनामधर्म, गुरू व सतनामी समाज के प्रति व्यक्ति के आस्था का प्रतिक है।
7.अमृत – सतनामधर्म में गुरू बाबाघासीदास जी नें सुख-दुख में अमृत जल पान का व्यवस्था दी है। आज भी गुरू वंषज सत्य का ध्यान कर,सत्यपुरूष/गुरू बाबाघासीदास जी के आज्ञा को पाकर संत समाज को साहेब गुरू सतनाम पाच गुरू के पाँच नाम से अमृत जल पान कराते है।

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